मदरसे के मासूम तल्बाओं को भांड मीडिया ने कहा दहशतगर्द…

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मुसलमानों के बारे में किस कदर और कितने हद तक मीडिया नफरत का जज़्बा रखता है उसका अंदाज़ा  हाल ही में एक वाकिये से होता है..शहर ए बेलगाम से करीब मदरसा सिराजुल उलूम है जहाँ कई सालों से हुफ्फाज़ ए किराम फारिग होकर बेलगाम ओ अतराफ़ में दिनी खिदमात अंजाम देते रहते है.बेहद खूबसूरत मदरसा है जहाँ पर सुबह-शाम कुरआन की तिलावत होती रहती है.जुमा को एक बार उमूमन सभी मदरसों में छुट्टी होती है लिहाज़ा सिराजुल उलूम को भी छुट्टी रहती है.शहर के अतराफ़ कुछ तलबा घूमते फिरते अपना वक़्त गुज़ार लेते है.मदरसे के करीब बेलगाम शहर का हवाई अड्डा है मदरसे के तलबा बंदेनवाज़ और समीर साथ में दो और कमसिन लड़के जो उसी मदरसे के तालिबे इल्म है घूमते हुए हवाई अड्डे तक पहुँच गए .हवाई अड्डे की दीवार का कद छोटा होने की वजह से दीवार कूद कर अंदर दाखिल हुए .उन्हें इस बात की खबर ही नहीं है के ओ मुसलमान है और मदरसे में पढ़नेवाले है जिन्हें आज दहशतगर्दी के अड्डे कहना एक तरह का फैशन बन चूका है.मासूम तलबा बेखबर थे  के उन्हें पेट्रॉलिंग करते पुलिस जीप ने देख लिया.सरों पर नमाज़ की टोपी झुब्बा कुरता पुलिसवालों के ख़ुशी का ठिकाना ना रहा क्यों के अब इन्हें आतंकवादी करार देना मुश्किल ना था.इसके बाद प्रमोशन,मेडल्स. वगैरा….
पुलिसवालों ने इन मासूमों को धरदबोचा बिलकुल पेशावर मुजरिमों की तरह .उन्हें खबर ही नहीं के पुलिस ने उन्हें क्यों गिरफ्तार किया हुआ है…? सुबह का नाश्ता मदरसे में कर के यूँ ही टहलते हम पुलिस ठाणे तक पहुँच जाएंगे और नेशनल मीडिया में सुर्खिया बन जाएंगे शायद ये मासूम बच्चे तसव्वुर भी नहीं कर सकते.लिहाज़ा पुलिसवालों ने इन्हें गिरफ्तार कर लिया और मरिहाल पुलिसथाने ले गए.
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पूछताछ जारी हुयी पूछताछ चल ही रही थी के न्यूज़ चैनलों  ने मदरसे के मासूम बच्चों को आतंकवादी घोषित कर दिया.झूट की इन्तहा तो तब हो गयी और इनके नफरत के पैमाने को तब नापा गया के इन बिचारे मासूम और ला-इल्म बच्चों को हथियार के साथ एयरपोर्ट पर दाखल होने की खबर बनायीं गयी.टीवी चैनलों में एक तरह का मुकाबला जारी हुआ के कौन ज़्यादा इन मासूमों को खतरनाक साबित कर सकता है.
बेलगाम शहर में भी इस खबर को पहूंचते देर नहीं लगी लोगों में ज़ोरदार तज़करा जारी हुआ के आखिर आतंकवादी एयरपोर्ट पर दाखिल कैसे हो गए…बेलगाम के नाम से  चलनेवाले न्यूज़ पोर्टल ने तो हथियार के साथ हवाई अड्डे पर घुसने की खबर को आम कर दिया.फिरकापरस्त हिंदुत्ववादी तंज़ीम तो इसी इंतज़ार में थे.उन्होंने वाट्सअप फेसबुक के ज़रिये खबर को फैलाना शुरू किया और कुछ ही लम्हों में नेशनल मीडिया तक खबर पहुंची के बेलगाम हवाई अड्डे पर दहशतगर्दों ने कब्ज़ा किया है.
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बड़े शर्म और अफ़सोस की बात है के ऐसे वक़्त में जहाँ मासूम ज़िन्दगियों का सवाल होता है बड़े ही एहतियात से मीडिया को बर्ताव करना चाहिए.लेकिन जैसे किसी धर्म विशेष के खिलाफ ज़हर उगलना ही इनका पेशा हो गया है.बहरहाल मामले की संजीदगी को देखते हुए पुलिस,इंतजामिया ने बड़े ही ज़िम्मेदारी से काम लेते हुए और हकीकत पर मबनी तहक़ीक़ को अंजाम देते हुए मदरसों के बच्चों को बेगुनाह और मासूम साबित किया.
पैगाम ए इत्तेहाद ने मदरसा सिराजुल उलूम का जायज़ा लिया और मोहतमिम मौलाना साजिद से मुलाकात फरमाई.उन्होंने तमाम वाक़ियात को बयां फ़रमाया और कमिश्नर कृष्ण भट और सीपीआई ज्योतिर्लिंग होनकट्टी का शुक्रिया अदा किया जो उन्होंने सही फैसला और तहक़ीक़ करते हुए मदरसे के तल्बाओं को रिहा किया.
मासूम बच्चे तो रिहा हुए.हमने देखा के आज भी उनके चेहरे पर एक तरह का खौफ है.जिन पुलिसकर्मियों ने उनके साथ रवय्या किया उसको  बयान करते हुए बंदेनवाज़ जो इन बच्चों में सबसे बड़ा था उसके साथ क्या हुआ बयान फ़रमाया..बंदेनवाज़ ने कहा “पुलिस ने उन्हें पकड़ा और बन्दुक दिखा कर दीवार से कूदने  के लिए कहा .मैं दीवार पर चढ़ गया तो चढ़ते वक़्त पुलिस ने तस्वीरें निकाली.
समझ में नहीं आता के मुस्लिम तल्बाओं के साथ मुस्लिम इदारों के साथ ही ऐसा क्यों बर्ताव किया जाता है.आज बच्चे ज़ेहनी दबाव में है.उनके माँ-बाप पर क्या बीतती होगी जिन्होंने इन मासूमों पर ज़िन्दगी भर के लिए और आख़िरत के लिए उम्मीद लगा कर बैठे होंगे.
आखिर भांड मीडिया जज़्बात से क्यों खेलती है.बिना तहक़ीक़ मासूमों को दहशतगर्द घोषित कर के कौनसी पत्रकारिता का हक्क  निभा रहे है.झूट पर झूट बोल कर कौनसा इत्मीनान इन्हें मिलता है.क्या जिन कन्नड़ चैनलों ने राष्ट्रीय चैनलों ने  बच्चों के एयरपोर्ट पर दाखिल होने की खबर को शाया किया था क्या उन्होंने इनकी मासूमियत या बेगुनाही की खबर चलाई.
एक तरफ मीडिया की चाटुकारिता समझ में आयी तो दूसरा पहलु भी इत्मिनान बक्श ये  था के पुलिस इंतेज़ामिया ने और खास कर कमिश्नर बेलगाम ने इन्साफ का मुजाहरा  किया.वरना ऐसे कई वाक़ियात मौजूद है जिनमे बेगुनाह अपने नाकर्दा गुनाहों की सज़ा पिछले  आठ ,दस साल से भुगत रहे है.
एक पहलु ये भी है के मदरसे के ज़िम्मेदाराना को चाहिए के तल्बाओं पर नज़र रखे इस लिए के हर बार बच्चे आसानी से रिहा होंगे इसकी कोई ग्यारंटी नहीं.आज मुस्लिम माशर इम्तेहान के दौर से गुज़र रहा है इसका सभी को अहसास होना ज़रूरी है.  .
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