कॉर्पोरेटर मतीन शेख़ अली गिरफ्तार.,आखिर आपसी इख़्तेलाफ़ से क्या हासिल….?

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पिछले हफ्ते जो वारदात बेलगाम शहर में हुयी इससे अवाम में काफी नाराज़गी देखने को मिली.आखिर क्या था ओ मामिला ..?माली मंच शादी हॉल में दो गिरोह आपस में टकराते है और फिर खूनखराबे तक मामिला पहुंच जाता है.सभी जानते है के फिरदौस दरगा और मतीन शेख़ अली के दरमियान पुराणी दुश्मनी थी.पर इसकी शिद्द्त्त इतनी भी नहीं थी के हथियार का इस्तेमाल किया जाय.दोनों बेलगाम शहर के काफी नामवर शख्सियत.लेकिन इनकी आपसी दुश्मनी का तमाशा जब लोगों ने देखा तो नाराज़गी का मुजाहरा किया गया,कई लोगों को ये भी कहते देखा के हर लिहाज़ से जब मुस्लिम माशरा आज़माइश से गुजर रहा है तो ख्वामखाह लड़ने की क्या ज़रूरत है.खैर मौलाना साजिद ने पहल की और सुलह की कोशिश फ़रमाई.बेलगाम शहर के तमाम ज़िम्मेदार अहबाब भी इस वक़्त नूरानी मस्जिद में मौजूद थे.एक टीम बनायीं और पहले मतीन से मुलाकात फ़रमाई गयी फिर फिरदौस दरगा से केएलई जाकर बात की गयी.मामला समझौते की तरफ बढ़ ही रहा था पर पुलिस करवाई दरमियान में आ गयी.दोनों अफ़राद अस्पताल से रिहा हुए पर मतीन शेख़ अली को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया.
मतीन शेख़ अली मौजूदा कॉर्पोरेटर है तो फिरदौस दरगा साबिक कॉर्पोरेटर रह चुके है.लिहाज़ा दो उर्दू कॉर्पोरेटरों की आपस में दुश्मनी शहर में चर्चा का मौजू रहा.मीडिया ने भी खूब उछाला..और उछलेंगे क्यों नहीं.
सवाल ये उठता है के आखिर हासिल क्या हुआ.जो भी हो..दुश्मनी है तो क्या इस तरह का तमाशा मुनासिब होगा..और     .हमें मालुम नहीं कौन सही और कौन गलत..पर क्या फिरकापरस्त तंज़ीम के अफ़राद भी इसमें दखल देने लगे तो आखिर हमने अपने जाती नफरत को किस इंतहा पर ले गए
यक़ीनन इस बात पर गौर करने की ज़रूरत है मौजूदा हालात ठीक नहीं है हर तरफ दुश्नाम घात लगाए  बैठा है किसी तरह से आपसी इख्तलाफात में मुलव्विस हो जाय इसका इंतज़ार बहोटों को है.कौम के खैरखाओं को चाहिए के ऐसा कोई कदम ना उठाये जिससे कौम के लोगों को कीमत चुकानी ना पढ़े.अगर दोनों तरफ से गिरोह टकराते है..पुलिस मुकद्दमे बन जाते है..अगर इसमें किसी की जान को नुक्सान होता है तो फिर कौन ज़िम्मेदार..दुश्मनी और नफरत की आग में कई घर तबाह हो सकते है.जब मुकद्दमे दायर किये जाते है तो दोनों तरफ के अफ़राद भी ज़द में आते है.क्या अब हमारी कौम में आपस में लड़ना ही एक काम रह गया है..?जब हर लिहाज़ से कौम को निशाने पर लिया जा रहा है ज़रूरी है के गली मोहल्लों के ज़िम्मेदारन भी आपसी इख़्तेलाफ़ को सुलह में तब्दील करने की कोशिश करे.
कुछ लोग बेलगाम शहर में खुलूस के साथ इत्तेहाद की कोशिश ज़रूर करते रहते है..पर बार बार झगडे सुलझाना..और ओ भी ऐसे लोग जिनकी अवाम में इज्जत ओ मर्तबा है..इन्हे तो इस तरह की हरकत से बाज़ आना चाहिए..वरना एक बार फिर मज़ाक़ बन जायेंगे
फ़िलहाल मतीन शेख़ अली ज़ेरे हिरासत जेल में है.ज़मानत की कोशिश जारी है.पर ये भी एक खदशा है के गणपति-और मुहर्रम की वजह से ताख़ीर ना हो जाय.कुछ लोग जिस तरह सुलह की कोशिश कर रहे है तो कुछ लोग तमाशा भी देख रहे है,एक ऐसा भी गिरोह सरगर्म होने की खबर है जो इस मामले को सुलझाना नहीं बल्कि आग में तेल डाल कर दुश्मनी को बढाने की कोशिश कर रहा है.मतीन शेख़ अली की जानिब से ज़ाहिर अब्बास हत्तरकी मुकद्दमा देख रहे है.
अल्लाह तआला से दुआ है के अल्लाह बेलगाम के मुसलमानों को इत्तेहाद-इत्तेफ़ाक़ से रहने की तौफ़ीक़ दे और आपसी नफरत को मिटा दे
sajjad ali belgaum
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